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गोड्डा : डिजिटल इंडिया टीम ने फर्स्ट इन मैथ (FIM) ऑनलाइन प्रोग्राम की पहल शुरू कर दी है । अब मैथ के कठिन सवाल बच्चे चुटकियों में हल कर सकेंगे । जिला प्रशासन की डिजिटल इंडिया टीम इसे बच्चों के मैथ्स के प्रति डर को दूर करने के लिए शुरू करने वाली है । मैथ्स के सवालों को अब सूत्रों और सरल तरीकों में पढ़ाया जायेगा । पहले इसे कुछ निजी विद्यालयों में शुरू किया जायेगा ।

क्या है एफआइएम : फ‌र्स्ट इन मैथ (एफआइएम) एक आनलाइन प्रोग्राम है। जिसे इस तरह तैयार किया गया है कि बच्चे आसानी से गणित को समझ सके। यह बच्चों के साथ - साथ उनके अभिभावकों को गणित अभ्यास करने का अवसर प्रदान करता है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत ई गवर्नेंस सर्विस इंडिया लिमिटेड के साथ सीएससी के सहयोग से एफआइएम को सूबे के विभिन्न जिलों में शुरुआत की जानी है। डिजिटल टीम द्वारा चिन्हित विद्यालयों में एफआइएम का संचालन सुनिश्चित करना है ताकि बच्चों की गणित मजबूत हो सके और बड़ा से बड़ा सवाल बच्चे आसानी से चंद मिनटों में पूरी कर सकें।


"बच्चों के अंदर गणित के भय को समाप्त करने का बीड़ा डिजिटल इंडिया ने उठाया है। सीएससी के माध्यम से जिले के स्कूलों में छात्रों को फ‌र्स्ट इन मैथ प्रोग्राम के जरिए गणित सिखाया जाएगा। इसके लिए कई विद्यालयों से संपर्क स्थापित किया गया है। माह के दूसरे पखवारे में इसकी लांच  होगी। प्रतिदिन मात्र दस मिनट का अभ्यास छात्रों में दस गुणा बेहतर परिणाम देगा। "  - आलोक आनंद, जिला समन्वयक, सीएससी गोड्डा


इस प्रोग्राम के तहत छात्रों को अलग - अलग लॉग इन आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा। इसके लिए छात्रों को 944 रुपये चुकाना होगा जिसकी वैधता वर्ष 2020 तक होगी। लॉग इन पासवर्ड की मदद से छात्र सीधे एफआइएम स्टूडेंट होम पेज पर जाकर गणित का सरल अध्ययन कर सकते हैं। 


पथरगामा : लखनपहाड़ी पंचायत के भांजपुर ग्राम में शनिवार की सुबह 45 वर्षीय शिवलाल टुडू ने गले में फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। मृतक की पत्नी वाहामय मरांडी ने बताया कि रोज की तरह शनिवार को शिवलाल टुडू सुबह उठा तथा दैनिक क्रिया करने के बाद बेटे प्रदीप टुडू (12 वर्ष) व पुत्री सरिता टुडू (8 वर्ष) के साथ बैठकर खाना खाया। खाने के बाद घर में सोने चला गया। मृतक की पत्नी ने बताया कि वह घर से कुछ दूरी पर दुकान चली गई थी। लौटने पर उसने  देखा कि घर का दरवाजा बंद है। आवाज देने पर भी किसी ने दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद धक्का देकर अंदर गई तो अंदर पति को फंदे से लटकते देखा। शोर मचाने पर घर से कुछ ही दूरी पर काम कर रहा पुत्र प्रदीप टुडू दौड़कर आया। आसपास के लोगों के सहयोग से पिता को फंदे से नीचे उतारा तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। 

ग्रामीणों ने इस घटना की सूचना पथरगामा थाना को दी। सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी भांजपुर ग्राम पहुंचे और शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए गोड्डा भेज दिया। पुत्र प्रदीप टुडू ने बताया कि पिता शिवलाल टुडू की मानसिक स्थिति पिछले कुछ माह से ठीक नहीं थी। इस वजह से वह खाना खा कर सो जाते थे। कभी कभी शराब के नशे में पूरे गांव का भ्रमण करते रहते थे। प्रतिदिन शराब पीते थे और मना करने के बावजूद भी वह नहीं मानते थे।




मेहरमा : सिदो-कान्हू मुर्मू विवि दुमका के कुलपति मनोरंजन प्रसाद सिन्हा ने कहा कि महागामा डिग्री कॉलेज एक साल के अंदर शुरू कर दिया जाएगा। विभाग को अविलंब भवन तैयार कर देने का निर्देश दिया गया है। एसआरटी कॉलेज धमड़ी में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। सत्र को नियमित कर दिया गया है। दुमका, देवघर व पाकुड़ कॉलेज को मान्यता देने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है। सुगाबथान डिग्री कॉलेज में भी अविलंब पढ़ाई शुरू की जाएगी। कुलपति शुक्रवार को यहां पहुंचने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे।


इससे पूर्व उन्होंने मेहरमा-पिरोजपुर बाइपास में शंकरपुर के समीप मां एजुकेशनल ट्रस्ट की ओर से संचालित सिन्हा इंटरनेशनल स्कूल का भूमि पूजन किया। पुलिस अधीक्षक राजीव रंजन सिह, डीएसई जितेंद्र कुमार सिन्हा, स्कूल के चेयरमैन निरंजन कुमार सिन्हा, सचिव मधुमाला सिन्हा, बीडीओ सुरेंद्र उरांव, सीओ खगेन महतो, कांग्रेस जिला अध्यक्ष दिनेश प्रसाद यादव आदि ने साथ दिया।

कुलपति ने कहा कि जिदगी में जो उलझते हैं वहीं सुलझते भी हैं। इसे स्कूल के चेयरमैन निरंजन कुमार सिन्हा ने साबित कर दिया है। कुलपति ने अपने डेढ वर्ष के कार्यकाल में स्वयं द्वारा विश्वविद्यालय को और बेहतर करने का प्रयास के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

सरकार के भरोसे सब कुछ संभव नहीं : पुलिस अधीक्षक राजीव रंजन सिह ने कहा कि बड़े शहरों में तो हर कोई स्कूल खोलना चाहता है सुदूरवर्ती क्षेत्र में निरंजन कुमार सिन्हा ने स्कूल खोला है जो काफी सराहनीय है। कहा कि सरकार के भरोसे शिक्षा और स्वास्थ्य में विशेष विकास नहीं हो सकता है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष दिनेश यादव ने वीर शहीद के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने व गरीब बच्चों को सहयोग करने की सराहना की। चेयरमैन निरंजन सिन्हा ने अभिभावकों से सहयोग का आग्रह किया। कहा कि लिटेरा जी स्कूल देवघर में 1800 बच्चे अध्ययनरत हैं जो अपने आप में एक मिसाल है। जिला शिक्षा अधीक्षक जितेन्द्र कुमार सिन्हा, बीडीओ सुरेंद्र उरांव, सीओ खगेन महतो, कांग्रेस के देवघर जिला अध्यक्ष मुन्नम संजय, महागामा विधानसभा प्रभारी मैनूल हक, कहलगांव (बिहार) के विवेकानंद ¨सह आदि थे। अतिथियों का स्वागत आदिवासी रीति रिवाज से आदिवासी युवतियों, माउंट लिटेरा जी स्कूल के छात्र- छात्राओं द्वारा किया गया। संचालन प्रोफेसर ओपी गुप्ता ने किया।



गोड्डा : युक्तीकरण के तहत जिले के 486 प्राथमिक शिक्षकों का स्थानांतरण किया गया है। इसके लिए विगत एक माह से भी अधिक समय से कवायद चल रही थी। मंगलवार की रात सूची सार्वजनिक कर दी गई। गौरतलब हो कि युक्तीकरण के क्रम में अगस्त में 399 शिक्षकों का स्थानांतरण किया गया था जिसमें व्यापक पैमाने पर अनियमितता की शिकायत उपायुक्त किरण कुमारी पासी को मिली थी। जांच के बाद स्थानांतरण की पूरी सूची रद कर दी गई थी। इसके बाद उपविकास आयुक्त सुनील कुमार की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया जिसमें डीआरडीए निदेशक अरुण एक्का, डीएसई जितेंद्र कुमार आदि शामिल थे। 

कमेटी ने शिक्षकों को एक-एक बुलाया और उनके समक्ष रिक्त पदों की सूची रखते हुए उसमें से चुनने को कहा। शिक्षकों ने विकल्प चुना और उसकी सूची सार्वजनिक की गई। उसपर दावा आपत्ति भी मांगा गया। दावा आपत्ति का निष्पादन करने के बाद अंतिम सूची प्रकाशित की गई। हालांकि गोड्डा प्रखंड में केवल महिलाओं के लिए ही रिक्तियां थी। महिला शिक्षकाओं ने ही सभी रिक्ति को भर दिया लेकिन बाद में निकली सूची में कुछ पुरुषों का नाम भी शामिल है। गोड्डा प्रखंड में 10 पुरुष शिक्षकों को जगह मिली है। काउंसिलिंग में शामिल होनेवाले कई शिक्षकों का नाम अंतिम सूची से वह गायब हो गया। कई शिक्षकों का कहना है कि प्रखंडवार शिक्षकों द्वारा चुने गए स्कूलों को प्रशासन द्वारा नेट पर डाला गया था। केवल उसी सूची को मिलान कर लिया जाए तो पता चल जाएगा कि कहां पर हेराफेरी की गई है। उपायुक्त दोषियों पर तुरंत कार्रवाई करे। आम शिक्षक कह रहे हैं कि जब डीसी ने डीडीसी की अध्यक्षता में सब काम पारदर्शी तरीके से किया फिर सूची में उलट-पलट किसने कर दिया। इन शिक्षकों का कहना है कि प्रशासन चुने विकल्प सूची के आधार पर ही शिक्षकों को विद्यालय दे। 

गुरुवार को कुछ शिक्षकों ने उपायुक्त को आवेदन देकर स्थानांतरण में गड़बड़ी की शिकायत करते हुए आवेदन भी दिया। उधर, कमेटी के नोडल पदाधिकारी डीआरडीए निदेशक अरुण एक्का का कहना है कि सब कुछ पारदर्शिता के साथ हुआ है। उन्होंने कहा कि दावा-आपत्ति के निष्पादन के क्रम में कुछ शिक्षकों को इधर से उधर किया गया है।



गोड्डा : गोड्डा जिले में इन्सेफेलाइटिस के दस्तक से स्वास्थ्य विभाग की परेशानी बढ़ गई है  ऐसे मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में रखने का प्रावधान है  मगर गोड्डा सदर अस्पताल में जगह की कमी होने और अलग वार्ड नहीं होने की वजह से सामान्य रोगियों के साथ ही इन्सेफेलाइटिस के मरीजों को रखा जा रहा है ऐसे में अन्य मरीजों में भी इसके संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है 


सदर अस्पताल के डीएस डीके चौधरी का कहना है कि इंसेफेलाइटिस के संभावित मरीज कुछ दिन से ही आ रहे हैं उन्हें अलग से रखने के लिए कोई व्यवस्था अभी नहीं हुई है, मगर जल्द ही एक अलग वार्ड तैयार कर लिया जाएगा ।

पोड़ैयाहाट: मातृ एवं शिशु दर में कमी को लेकर एक ओर सरकार कई योजनाएं चला रही हैं और करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की अनदेखी के कारण प्रसव के उपरांत 20 वर्षीय मरांग बीटी मुर्मू की मौत से पूरे विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। परिजनों में इस बात को लेकर काफी आक्रोश है। रात में जब मरांग बीटी मुर्मू को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। उस समय किसी भी चिकित्सक ने उसे देखा तक नहीं बल्कि एक नर्स ने उसे भर्ती कर लिया। रात में ही सभी दवाई बाजार से लाने के लिए कह दिया। बाजार से दवाई लेकर आने के बाद मरांग बीटी ने एक बच्चे को जन्म दिया। सुबह जब चिकित्सक पहुंचे तो आनन - फानन में इसे तुरंत गोड्डा रेफर कर दिया। गोड्डा ले जाने के क्रम में रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मरांग बीटी मुर्मू अमवार के रहने वाले हैं जो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से महज दो किलोमीटर की दूरी पर है। सरकार ने गर्भवती महिलाओं को लेकर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान चलाया है। लेकिन, इसके बाद भी मरांग बीटी मुर्मू की मौत हो गई। 

अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कि उसे रक्त की कमी थी जिनके कारण उन्हें गोड्डा भेजा गया यहां ब्लड देने और चढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं थी। अगर स्वास्थ्य कर्मी रात में ही इस बात को उनके परिजनों को बोल दिया होता तो वह उसे गोड्डा लेकर चले जाते। उस क्षेत्र के एएनएम ने बताया कि मरांग बेटी मुर्मू अपने मायके आकाशी में ही रहती थी। अंतिम महीने में अमवार आई थी। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर सतीश कुमार ने बताया कि सारे आरोप निराधार है। रात में ही उसे कह दिया गया था प्रसव होने के बाद ज्यादा खून बहने के कारण उसे रेफर कर दिया गया था। उसका इलाज सही तरीके से चला है उसमें कोई लापरवाही नहीं बरती गई है।

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