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प्रसव के बाद महिला की मौत, परिजनों में आक्रोश

पोड़ैयाहाट: मातृ एवं शिशु दर में कमी को लेकर एक ओर सरकार कई योजनाएं चला रही हैं और करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की अनदेखी के कारण प्रसव के उपरांत 20 वर्षीय मरांग बीटी मुर्मू की मौत से पूरे विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। परिजनों में इस बात को लेकर काफी आक्रोश है। रात में जब मरांग बीटी मुर्मू को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। उस समय किसी भी चिकित्सक ने उसे देखा तक नहीं बल्कि एक नर्स ने उसे भर्ती कर लिया। रात में ही सभी दवाई बाजार से लाने के लिए कह दिया। बाजार से दवाई लेकर आने के बाद मरांग बीटी ने एक बच्चे को जन्म दिया। सुबह जब चिकित्सक पहुंचे तो आनन - फानन में इसे तुरंत गोड्डा रेफर कर दिया। गोड्डा ले जाने के क्रम में रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मरांग बीटी मुर्मू अमवार के रहने वाले हैं जो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से महज दो किलोमीटर की दूरी पर है। सरकार ने गर्भवती महिलाओं को लेकर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान चलाया है। लेकिन, इसके बाद भी मरांग बीटी मुर्मू की मौत हो गई। 

अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कि उसे रक्त की कमी थी जिनके कारण उन्हें गोड्डा भेजा गया यहां ब्लड देने और चढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं थी। अगर स्वास्थ्य कर्मी रात में ही इस बात को उनके परिजनों को बोल दिया होता तो वह उसे गोड्डा लेकर चले जाते। उस क्षेत्र के एएनएम ने बताया कि मरांग बेटी मुर्मू अपने मायके आकाशी में ही रहती थी। अंतिम महीने में अमवार आई थी। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर सतीश कुमार ने बताया कि सारे आरोप निराधार है। रात में ही उसे कह दिया गया था प्रसव होने के बाद ज्यादा खून बहने के कारण उसे रेफर कर दिया गया था। उसका इलाज सही तरीके से चला है उसमें कोई लापरवाही नहीं बरती गई है।

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